अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जनवरी 2025 में फिर से सत्ता में आने के बाद भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा संबंधों में नई गति आई है। खासकर अप्रैल-जून 2025 तिमाही में भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि दर्ज की है, हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर टैरिफ और रूस से तेल आयात को लेकर पेनल्टी लगाई है।
तेल आयात में उछाल
अप्रैल-जून 2025 में रिकॉर्ड वृद्धि: 2024 की समान तिमाही में भारत ने अमेरिका से लगभग 15 हजार करोड़ रुपए का कच्चा तेल खरीदा था, जो 2025 में बढ़कर 32 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह सालाना आधार पर 114% की वृद्धि को दर्शाता है।
दैनिक आयात: जनवरी-जून 2025 के बीच भारत ने प्रतिदिन औसतन 2.71 लाख बैरल कच्चा तेल अमेरिका से आयात किया, जो 2024 की समान अवधि के 1.8 लाख बैरल प्रतिदिन से काफी अधिक है।
अमेरिका की हिस्सेदारी: भारत के कुल तेल आयात में अमेरिका का योगदान 3% से बढ़कर 8% हो गया है। जुलाई 2025 में जून की तुलना में 23% अधिक तेल आयात हुआ।
ट्रम्प का टैरिफ और पेनल्टी
2 अप्रैल 2025 को ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, हालांकि इसे 90 दिन के लिए टाल दिया गया। इसके बावजूद भारत ने अमेरिका से तेल आयात बढ़ाया। 30 जुलाई 2025 को ट्रम्प ने भारत पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया, यह दलील देते हुए कि भारत रूस से अपनी सैन्य जरूरतों और तेल की सबसे बड़ी खरीदार है, जो रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में अनुचित है। भारत अभी रूस से अपनी जरूरत का लगभग 40% तेल, यानी प्रतिदिन 1.15 मिलियन बैरल, आयात करता है।
रूस से तेल आयात पर विवाद
रॉयटर्स का दावा: हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमेरिकी दबाव और कीमतों में वृद्धि के कारण भारतीय तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है या लगभग बंद कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में रूस से तेल की कोई नई मांग नहीं की गई, क्योंकि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट 2022 के बाद सबसे निचले स्तर पर है और शिपिंग में दिक्कतें बढ़ी हैं।
भारत का जवाब: भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि तेल खरीद के फैसले बाजार की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित हैं, न कि किसी बाहरी दबाव पर। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में यह स्पष्ट किया।
ट्रम्प की प्रतिक्रिया: ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय मीडिया से कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि भारत रूस से तेल आयात कम कर सकता है, लेकिन उन्होंने इसकी पुष्टि नहीं की। उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत माना और आगे की स्थिति पर नजर रखने की बात कही।
प्रभाव और विश्लेषण
भारत की अमेरिका से तेल आयात में वृद्धि ऊर्जा सुरक्षा और विविधीकरण की दिशा में एक कदम है, लेकिन ट्रम्प की पेनल्टी और टैरिफ नीतियां इसे चुनौती दे रही हैं। रूस से तेल आयात में कमी की खबरें, यदि सही साबित होती हैं, तो भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव इंगित करेंगी। हालांकि, विदेश मंत्रालय का बयान सुझाव देता है कि भारत अपने हितों के आधार पर निर्णय ले रहा है, न कि केवल अमेरिकी दबाव में।
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है, लेकिन रूस से तेल आयात और ट्रम्प की नीतियों ने इसे जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को कैसे संतुलित करता है और क्या रूस से आयात पूरी तरह बंद होता है या यह केवल अस्थायी बदलाव है।
