नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की जंग को लेकर आज भी दोनों देशों में अलग-अलग दावे किए जाते हैं। जहां भारत इसे अपनी निर्णायक जीत मानता है, वहीं पाकिस्तान की ओर से कई बार बयान दिए जाते रहे हैं कि उसकी सेना ने भारत का हमला नाकाम कर दिया था। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें लिखा गया कि 1965 की जंग पाकिस्तान की “स्ट्रैटजिक हार” थी।
दरअसल, 6 सितंबर 1965 को पाकिस्तान ने ऑपरेशन “ग्रैंड स्लैम” के तहत जम्मू-कश्मीर में भारतीय क्षेत्र पर हमला किया था। इसका मकसद अखनूर को कब्जे में लेकर भारत की सप्लाई लाइन काटना था। लेकिन भारतीय सेना ने न सिर्फ पाकिस्तान की इस योजना को विफल किया, बल्कि लाहौर और सियालकोट जैसे अहम मोर्चों तक मोर्चा संभाल लिया।
युद्ध 22 दिन चला और अंततः 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम लागू हुआ। इस जंग में भारत ने पाकिस्तान की कई अहम चौकियां और लगभग 1,800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था, जबकि पाकिस्तान भारत की सिर्फ 550 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर सका।
हालांकि, पाकिस्तान ने अपने देश में इसे जीत बताकर पेश किया। तत्कालीन पाक प्रधानमंत्री नेशनल असेंबली में बयान देते हुए कहा था कि “हमारी बहादुर सेना ने दुश्मन का हमला नाकाम किया और भारत को सबक सिखाया।” मगर हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय सैन्य विश्लेषकों और इतिहासकारों ने 1965 की जंग को पाकिस्तान की रणनीतिक असफलता बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने सोचा था कि कश्मीर में स्थानीय लोग उसके समर्थन में उठ खड़े होंगे, लेकिन यह अनुमान गलत साबित हुआ। दूसरी ओर, भारतीय सेना ने अनुशासन और साहस के बल पर पाकिस्तान को हर मोर्चे पर पीछे धकेला।
इतिहासकारों का कहना है कि 1965 की जंग ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाया और पाकिस्तान की रणनीति पूरी तरह विफल हो गई। इसीलिए आज भी इसे पाकिस्तान की “स्ट्रैटजिक हार” कहा जाता है।
