नई दिल्ली। भारतीय सेना जल्द ही एक ऐसी स्पेशल फोर्स बनाने जा रही है, जो अमेरिका, रूस और इजराइल की तर्ज पर दुश्मन के इलाके में घुसकर ऑपरेशन अंजाम दे सकेगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस यूनिट के लिए जॉइंट वॉर थ्योरी का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, जिस पर जल्द ही अमल शुरू होगा।
क्या होगी नई स्पेशल फोर्स की खासियत?
यह फोर्स थल, जल और वायु सेना के चुनिंदा जवानों से बनाई जाएगी।
दुश्मन के ठिकानों पर प्रोएक्टिव स्ट्राइक कर सकेगी।
हाई-टेक हथियारों और अत्याधुनिक निगरानी सिस्टम से लैस होगी।
आतंकवाद, साइबर वार और सीमापार खतरों से निपटने में सक्षम होगी।
क्यों है इसकी जरूरत?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में भारत को दो मोर्चों—चीन और पाकिस्तान—से सुरक्षा चुनौतियां हैं। ऐसे में एकीकृत स्पेशल फोर्स से आतंकवाद, बॉर्डर पेनिट्रेशन और हाई वैल्यू टारगेट्स को बेहतर ढंग से काउंटर किया जा सकेगा।
ग्लोबल मॉडल से सीख
अमेरिका की नेवी सील्स, रूस की स्पेत्सनाज़ और इजराइल की सायरत मटकल दुनिया की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्सेज मानी जाती हैं। भारत की यह नई यूनिट भी इन्हीं के मॉडल पर तैयार होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर दुश्मन की सीमा के भीतर जाकर भी कार्रवाई की जा सके।
आगे की योजना
रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द ही उच्चस्तरीय चर्चा होगी। माना जा रहा है कि आने वाले सालों में यह फोर्स भारतीय सेना की रीढ़ साबित होगी।
